Monday, 30 August 2021

‘भारत के दो हिस्से करो, एक हिस्सा ईसाइयों को दो… इसके बाद हम आपको परेशानी नहीं देंगे’: आंध्र प्रदेश का पादरी

 30 August, 2021

बाइबल ओपन यूनिवर्सिटी इंटरनेशनल के उप निदेशक पादरी उपेंद्र राव की एक वीडियो वायरल हुई है। इस वीडियो में उन्हें भारत को दो हिस्सों में विभाजित करने की माँग करते हुए सुना जा सकता है।

वीडियो में वह कहते हैं, “हम प्रिय नेता पीडी सुंदर राव के नेतृत्व में ऑल इंडिया ट्रू क्रिश्चियन काउंसिल की ओर से माँग करते हैं कि भारत को दो हिस्सों में विभाजित किया जाना चाहिए और ईसाइयों को एक अलग देश के तौर पर एक आधा हिस्सा दिया जाना चाहिए।”

हैरान करने वाली इस वीडियो को एससी/एसटी राइट्स फोरम ने अपने ट्विटर पर साझा किया है। इसमें पादरी आगे कहता है, “इसके बाद (विभाजन के बाद) हम आपको परेशानी नहीं देंगे।” ये वीडियो 24 अगस्त को शेयर की गई थी।

पादरी के उपेंद्र राव कथित तौर पर तेलंगाना और महाराष्ट्र के लिए अखिल भारतीय सच्चे ईसाई परिषद के राज्य अध्यक्ष भी हैं। उनकी वीडियो वायरल होने के बाद जब AITCC का फेसबुक खंगाला गया तो मालूम हुआ कि पेज 2019 से लगभग बंद पड़ा हुआ है, मगर, उससे पहले के पोस्ट देखें तो पता चलता है कि संगठन ने कुछ कार्यक्रमों की तस्वीर साझा की हुई हैं। इसमें एक में दिखाया है कि कैसे AITCC ने “GOD’s servant” को बाइक स्पॉन्सर की।

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बता दें कि धर्मांतरण और ईसाईकरण का कारोबार भारत के कई हिस्सों में फैला हुआ है। आंध्र प्रदेश, तमिल नाडु, तेलंगाना इसके उदाहरण हैं। कई मिशनरी तमाम तरह के हथकंडे अपना कर गरीबों को इसका शिकार बना रहे हैं। हमने पहले की रिपोर्टस में बताया भी था कि पुलिस ने ऐसे ही मामले में तीन पादरियों पर मुकदमा दर्ज किया था। ये पादरी सोशल मीडिया पर बच्चों की तस्वीर पोस्ट करके उन्हें अनाथ बताकर धन इकट्ठा करने की कोशिश कर रहे थे। रैकेट का खुलासा पिछले माह कृष्ण जिले के थुक्कुलुर के ग्रामीणों ने किया था। कार्रवाई में एक पादरी को हिरासत में लिया गया था जबकि बाकी दो फरार होने में सफल हो गए थे।

https://hindi.opindia.com/national/andhra-pradesh-divide-india-into-two-and-handover-one-to-christians-says-pastor/

पादरी के घर पर हमला कर भीड़ ने पीटा, चेताया: कहा- आदिवासियों का ईसाई धर्मांतरण बंद करो

 30 August, 2021

छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले के एक गाँव में धर्मांतरण कराने को लेकर पादरी को पीटने का मामला सामने आया है। रविवार (29 अगस्त) को 100 से अधिक लोगों की भीड़ ने पादरी के घर में घुसकर कथित तौर पर उसे और उसके परिवार को पीटा। एक पुलिस अधिकारी के अनुसार, भीड़ ने इस दौरान आदिवासी क्षेत्रों में ईसाई मिशनरियों के धर्मांतरण के खिलाफ नारे भी लगाए।

यह घटना रविवार सुबह करीब 11 बजे की है। बताया जा रहा है कि भीड़ धर्मांतरण के खिलाफ नारे लगाते हुए पादरी कवलसिंह परस्ते (25 साल) के घर में घुस गई। उस समय उनके घर में प्रार्थना चल रही थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक, परस्ते के घर में तोड़फोड़ की गई और उनके परिवार के साथ मारपीट भी की गई।

कबीरधाम के पुलिस अधीक्षक मोहित गर्ग ने बताया, “प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, 100 से अधिक लोगों की भीड़ उनके घर में घुस गई और कथित तौर पर पूजा करने की वस्तुओं, घरेलू सामानों को क्षतिग्रस्त कर दिया और उनकी पवित्र पुस्तक को भी फाड़ दिया।” गर्ग ने यह भी बताया कि हमले की सूचना मिलते ही पुलिस की एक टीम मौके पर पहुँची। उन्होंने कहा कि मामला दर्ज कर लिया गया है और जल्द ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।

इस बीच छत्तीसगढ़ के क्रिश्चियन फोरम के अध्यक्ष अरुण पन्नालाल ने पुलिस और राज्य सरकार पर ईसाई प्रार्थना स्थलों पर हमले के मामलों में उचित कार्रवाई नहीं करने का आरोप लगाया है। अरुण पन्नालाल ने कहा, “यह एक बहुत ही खतरनाक प्रवृत्ति है, जो राज्य में प्रचलित हो गई है और सरकार इसे रोकने में विफल रही है। हम इस सरकार के सुस्त रवैये से बेहद आहत हैं।”

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पन्नालाल ने आरोप लगाया, “पिछले 15 दिनों में राज्य भर में हमारे धार्मिक स्थलों पर कथित तौर पर कम से कम 10 ऐसे हमले हुए, लेकिन किसी भी मामले में पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। हम सिर्फ न्याय चाहते हैं। हालाँकि, ऐसी घटनाओं के बार-बार होने से पता चलता है कि सरकार उन लोगों का साथ दे रही है, जो ऐसे बर्बरतापूर्ण हमले में शामिल हैं।”

पन्नालाल ने चर्चों में की गई तोड़फोड़ के सभी सबूत पेश करते हुए सुप्रीम कोर्ट में एक जनहित याचिका (PIL) दायर करने की भी धमकी दी है। उन्होंने यह भी कहा कि जनहित याचिका में ऐसे मामलों में पुलिस की कथित निष्क्रियता का स्पष्ट उल्लेख होगा।

गौरतलब है कि हाल ही में पंजाब से एक वीडियो सामने आया था, जिसमें पादरी बजिंदर को एक बच्चे का इस्तेमाल अंधविश्वास फैलाने और लोगों को बेवकूफ बनाने के लिए करते हुए देखा गया था। एनसीपीसीआर ने चंडीगढ़ के डिप्टी कमिश्नर मनदीप सिंह बराड़ को ‘पादरी बजिंदर सिंह‘ के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा है, जो एक नाबालिग लड़के को अपने अंधविश्वासी धर्मांतरण प्रचार के लिए इस्तेमाल करता है। बजिंदर ने बच्चे को लोगों से यह कहने के लिए मजबूर किया था कि उसकी मूक बहन अचानक यशु के ‘चमत्कार’ के कारण बोलने लगी थी।


https://hindi.opindia.com/national/chhattisgarh-pastor-beaten-up-by-mob-alleged-religious-conversion/

Wednesday, 4 August 2021

वाराणसी के एक गांव का हिंदू परिवार, लालच दे बना रहे थे ईसाई : महिला समेत 3 गिरफ्तार

 

उत्तर प्रदेश में वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के करखियाँव गाँव में गरीब हिंदू परिवारों को लालच देकर उनका ईसाई धर्मान्तरण कराने की कोशिश करने का मामला सामने आय़ा है। इस मामले में तीन लोगों को ग्रामीणों और हिंदू जागरण मंच के लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपितों में एक महिला भी है। तीनों एक गरीब हिंदू परिवार लालजी विश्वकर्मा के घर आए थे। ये उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के एवज अच्छी शिक्षा, पैसा और परवरिश का प्रलोभन दे रहे थे। आरोपितों में से एक नील तुरै मूल रूप से तमिलनाडु से है औऱ वाराणसी के वीरभानपुर गाँव में रहता है। दो अन्य विजय कुमार और उसकी पत्नी जिले के ही भाऊपुर गाँव के रहने वाले हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि तीनों को अक्सर गाँवों में आर्थिक रूप से कमजोर और कम पढ़े-लिखे लोगों को ईसाई धर्मान्तरण का लालच देते देखा गया है। इस मामले में हिंदू जागरण मंच के प्रदेश मंत्री गौरीश सिंह ने कहा कि मंगलवार (3 अगस्त 2021) को उन्हें ग्रामीणों से इन तीनों के करखियाँव गाँव में आकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दवाब डालने की जानकारी मिली थी। मौके पर पहुँचने के बाद इनके पास से ईसाई धर्म से जुड़ी पुस्तकें मिलीं। आरोपितों ने दो घरों में धर्मान्तरण कराने की कोशिश की बात भी कबूली।

गौरीश सिंह की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया है। फूलपुर के थाना प्रभारी सुनील सिंह का कहना है कि इनसे पूछताछ की जा रही है। इससे पहले भी वाराणसी के जंसा, फूलपुर औऱ चौबेपुर जैसी जगहों पर धर्मान्तरण कराने के कई मामले सामने आए थे। उन मामलों में पुलिस ने कार्रवाई भी की थी।

Monday, 26 July 2021

धर्मांतरण कोई समस्या नहीं, अपने घर में सम्मान न मिले तो दूसरे के घर जाएंगे ही :

 

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM)’ के अध्यक्ष जीतन राम मांझी के महादलितों के धर्मांतरण का बचाव किया है। गया में पिछले कई वर्षों से सिलसिलेवार तरीके से ईसाई धर्मांतरण की साजिश का खुलासा हुआ है। कई गांवों में अंधविश्वास के आधार पर धर्मांतरण का जाल फैलाया गया। मांझी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हिन्दू धर्म के भीतर भेदभाव धर्मांतरण का बड़ा कारण है।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “धर्म को लेकर भेदभाव ही धर्मांतरण का प्रमुख कारण है। जब अपने घर में मान न मिले तो स्वभाविक है लोग दूसरे घरों में जाएंगे ही। धर्म-परिवर्तन से हिंदुस्तान की एकता पर कोई खतरा नहीं है क्योंकि यह धर्मनिरपेक्ष (Secular) देश है। यहाँ आपको इसकी स्वतंत्रता है कि आप अपने मन के अनुसार धर्म पालन कर सकते हैं, इसका प्रचार-प्रसार कर सकते हैं।”

मांझी ने कहा कि ऐसी स्थिति में कौन किस धर्म में जा रहा है, उनकी समझ में ये कोई समस्या का विषय नहीं है। HAM सुप्रीमो ने कहा कि जब अपने घर में मान, इज्जत व मर्यादा न मिले और दूसरी जगह मान इज्जत और मर्यादा मिल रही है तो स्वाभाविक है लोग वहीं जाएँगे। मांझी ने साथ ही कहा कि घर के मालिक को समझना चाहिए कि आखिर ये लोग क्यों जा रहे हैं और क्या आपके यहाँ उनका विकास संभव नहीं है?

साथ ही जीतन राम मांझी ने कहा कि आप छुआछूत की बात करते हो, लेकिन याद रखने की ज़रूरत है कि जब-जब अपना घर लचीला होता है, तब-तब उस धर्म का प्रचार हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म कड़ा हुआ है, तब उसका प्रचार हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री जब किसी मंदिर में जाते हैं तो उनके निकलने के बाद उसे धोया जाता है। उन्होंने पूछा कि इसे क्या समझा जाए?

उन्होंने दावा किया कि महादलितों की उपेक्षा से उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची, जिसके बाद उन्होंने धर्म-परिवर्तन किया। साथ ही ये दावा भी कर बैठे कि महादलित बिना किसी दबाव के ये सब कर रहे हैं। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा होने की बात भी नकार दी। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति यही रही तो धर्म-परिवर्तन की कई अन्य घटनाएँ भी सामने आएँगी। इस दौरान उन्होंने बाबसाहब भीमराव आंबेडकर की भी प्रशंसा की।

बता दें कि गया के महादलितों को एक साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है, ऐसा कई मीडिया रिपोर्ट्स से खुलासा हुआ है। सिर्फ पिछले 2 वर्षों में ही जिले के लगभग आधा दर्जन गांवों में धर्मांतरण हुआ है। ध्यान देने वाली बात ये भी है कि जिन लोगों पर धर्मांतरण कराने के आरोप लगे हैं, उनमें अधिकतर पहले हिन्दू हुआ करते थे। गया के नैली पंचायत के बेलवादीह गांव में 50 हिन्दू परिवारों द्वारा ईसाई मजहब अपनाए जाने की खबर आई थी।

इसी तरह 6 वर्ष पहले मानपुर प्रखंड के खंजाहापुर गांव में 500 लोग हिन्दू से बौद्ध बन गए थे। टेकारी के केवड़ा, मुफ्फसिल के दोहारी, अतरी के टेकरा, बोधगया के अतिया और गया सदर के रामसागर टैंक इलाके में धर्म-परिवर्तन की घटनाएँ सामने आई हैं। डोभी से लेकर बाराचट्‌टी तक, कई गांवों में धर्मांतरण की ख़बरें सामने आती रहती हैं। इसके पीछे अंधविश्वास को कारण बताया जा रहा है। सालों से इसके पीछे लगे गिरोह इसकी तैयारी करते हैं।

संदर्भ : OpIndia

Tuesday, 20 July 2021

हिंदू जागरण मंच के विरोध के बाद ईसाई धर्मांतरण करा रहे 5 लोगों को यूपी पुलिस ने किया ​गिरफ्तार

 

हिंदू जागरण मंच के विरोध के बाद ईसाई धर्मांतरण करा रहे 5 लोगों को यूपी पुलिस ने किया ​गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में धर्मांतरण का प्रयास कर रहे 5 लोगों को ​गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने धर्म परिवर्तन करा रहे लोगों के पास से आपत्तिजनक साहित्य भी बरामद किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिकंदरपुर वैश्य थाना क्षेत्र गाँव गंगपुर में रविवार (18 जुलाई) को हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को ईसाई धर्म का प्रचार करने वाले लोगों द्वारा धर्मांतरण कराने की सूचना मिली। इसके बाद दर्जनों कार्यकर्ता गाँव में पहुँचे और उन्होंने इसका विरोध किया।

हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जब उन्होंने ईसाई धर्मांतरण का विरोध किया, तो उन लोगों ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर आरोपितों की तलाशी ली। इस दौरान धर्मांतरण करा रहे लोगों के पास से पुलिस को एक कॉपी में हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियाँ लिखी हुई मिली।

हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और 5 लोगों को धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार कर लिया है। हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारी अरविंद गुप्ता ने इन लोगों के खिलाफ थाना सिकंदरपुर वैश्य में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने श्रीनिवास, कुलदीप निवासी लधौली, राहुल कुमार निवासी कपिपुरा जैथरा, शिवकुमार निवासी गाँव नगला रामजीत, दुर्गेश निवासी हरौड़ा, रामपाल निवासी गंगपुर और किशन निवासी नगला बोडार पर धर्म ​परिवर्तन का आरोप लगाया है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश से हर रोज धर्मांतरण के नए मामले सामने आ रहे हैं। सोमवार (19 जुलाई) को बागपत जिले में 15 साल की दलित किशोरी के साथ गैंगरेप, धर्मांतरण और गोमांस खिलाने का मामला सामने आया। पीड़िता के 7 महीने की गर्भवती होने के बाद मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने मुख्य आरोपित शहजाद और उसके अम्मी-अब्बू को गिरफ्तार कर लिया है।

संदर्भ : OpIndia

Wednesday, 19 May 2021

ଜଙ୍ଗଲ ଜମିରେ ଚର୍ଚ୍ଚ ନିର୍ମାଣକୁ ବିରୋଧ

 ଖ୍ରୀଷ୍ଟିଆନଙ୍କ ଆତଙ୍କରାଜ

ଜଙ୍ଗଲ ଜମିରେ ଚର୍ଚ୍ଚ ନିର୍ମାଣକୁ ବିରୋଧ

https://samajaepaper.in/imageview_60_195202111513890_4_75_19-05-2021_8_i_1_sf.html

Sunday, 9 May 2021

नेहरू के अखबार का वो पत्रकार, जिसने पोप को दी चुनौती… धर्म परिवर्तन के खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद की रखी नींव

 ଧର୍ମାନ୍ତରିକରଣ

नेहरू के अखबार का वो पत्रकार, जिसने पोप को दी चुनौती… धर्म परिवर्तन के
खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद की रखी नींव
https://hindi.opindia.com/miscellaneous/indology/swami-chinmayananda-saraswati-founded-vhp-challenged-pope-and-christian-conversion/