Wednesday, 4 August 2021

वाराणसी के एक गांव का हिंदू परिवार, लालच दे बना रहे थे ईसाई : महिला समेत 3 गिरफ्तार

 

उत्तर प्रदेश में वाराणसी के फूलपुर थाना क्षेत्र के करखियाँव गाँव में गरीब हिंदू परिवारों को लालच देकर उनका ईसाई धर्मान्तरण कराने की कोशिश करने का मामला सामने आय़ा है। इस मामले में तीन लोगों को ग्रामीणों और हिंदू जागरण मंच के लोगों ने पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया है।

गिरफ्तार किए गए आरोपितों में एक महिला भी है। तीनों एक गरीब हिंदू परिवार लालजी विश्वकर्मा के घर आए थे। ये उन्हें ईसाई धर्म अपनाने के एवज अच्छी शिक्षा, पैसा और परवरिश का प्रलोभन दे रहे थे। आरोपितों में से एक नील तुरै मूल रूप से तमिलनाडु से है औऱ वाराणसी के वीरभानपुर गाँव में रहता है। दो अन्य विजय कुमार और उसकी पत्नी जिले के ही भाऊपुर गाँव के रहने वाले हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि तीनों को अक्सर गाँवों में आर्थिक रूप से कमजोर और कम पढ़े-लिखे लोगों को ईसाई धर्मान्तरण का लालच देते देखा गया है। इस मामले में हिंदू जागरण मंच के प्रदेश मंत्री गौरीश सिंह ने कहा कि मंगलवार (3 अगस्त 2021) को उन्हें ग्रामीणों से इन तीनों के करखियाँव गाँव में आकर ईसाई धर्म अपनाने के लिए दवाब डालने की जानकारी मिली थी। मौके पर पहुँचने के बाद इनके पास से ईसाई धर्म से जुड़ी पुस्तकें मिलीं। आरोपितों ने दो घरों में धर्मान्तरण कराने की कोशिश की बात भी कबूली।

गौरीश सिंह की शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीनों को हिरासत में ले लिया है। फूलपुर के थाना प्रभारी सुनील सिंह का कहना है कि इनसे पूछताछ की जा रही है। इससे पहले भी वाराणसी के जंसा, फूलपुर औऱ चौबेपुर जैसी जगहों पर धर्मान्तरण कराने के कई मामले सामने आए थे। उन मामलों में पुलिस ने कार्रवाई भी की थी।

Monday, 26 July 2021

धर्मांतरण कोई समस्या नहीं, अपने घर में सम्मान न मिले तो दूसरे के घर जाएंगे ही :

 

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और ‘हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM)’ के अध्यक्ष जीतन राम मांझी के महादलितों के धर्मांतरण का बचाव किया है। गया में पिछले कई वर्षों से सिलसिलेवार तरीके से ईसाई धर्मांतरण की साजिश का खुलासा हुआ है। कई गांवों में अंधविश्वास के आधार पर धर्मांतरण का जाल फैलाया गया। मांझी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हिन्दू धर्म के भीतर भेदभाव धर्मांतरण का बड़ा कारण है।

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा, “धर्म को लेकर भेदभाव ही धर्मांतरण का प्रमुख कारण है। जब अपने घर में मान न मिले तो स्वभाविक है लोग दूसरे घरों में जाएंगे ही। धर्म-परिवर्तन से हिंदुस्तान की एकता पर कोई खतरा नहीं है क्योंकि यह धर्मनिरपेक्ष (Secular) देश है। यहाँ आपको इसकी स्वतंत्रता है कि आप अपने मन के अनुसार धर्म पालन कर सकते हैं, इसका प्रचार-प्रसार कर सकते हैं।”

मांझी ने कहा कि ऐसी स्थिति में कौन किस धर्म में जा रहा है, उनकी समझ में ये कोई समस्या का विषय नहीं है। HAM सुप्रीमो ने कहा कि जब अपने घर में मान, इज्जत व मर्यादा न मिले और दूसरी जगह मान इज्जत और मर्यादा मिल रही है तो स्वाभाविक है लोग वहीं जाएँगे। मांझी ने साथ ही कहा कि घर के मालिक को समझना चाहिए कि आखिर ये लोग क्यों जा रहे हैं और क्या आपके यहाँ उनका विकास संभव नहीं है?

साथ ही जीतन राम मांझी ने कहा कि आप छुआछूत की बात करते हो, लेकिन याद रखने की ज़रूरत है कि जब-जब अपना घर लचीला होता है, तब-तब उस धर्म का प्रचार हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि जब-जब धर्म कड़ा हुआ है, तब उसका प्रचार हुआ है। साथ ही उन्होंने कहा कि एक मुख्यमंत्री जब किसी मंदिर में जाते हैं तो उनके निकलने के बाद उसे धोया जाता है। उन्होंने पूछा कि इसे क्या समझा जाए?

उन्होंने दावा किया कि महादलितों की उपेक्षा से उनकी भावनाओं को ठेस पहुँची, जिसके बाद उन्होंने धर्म-परिवर्तन किया। साथ ही ये दावा भी कर बैठे कि महादलित बिना किसी दबाव के ये सब कर रहे हैं। उन्होंने इसे देश की सुरक्षा के लिए खतरा होने की बात भी नकार दी। उन्होंने कहा कि अगर स्थिति यही रही तो धर्म-परिवर्तन की कई अन्य घटनाएँ भी सामने आएँगी। इस दौरान उन्होंने बाबसाहब भीमराव आंबेडकर की भी प्रशंसा की।

बता दें कि गया के महादलितों को एक साजिश के तहत निशाना बनाया जा रहा है, ऐसा कई मीडिया रिपोर्ट्स से खुलासा हुआ है। सिर्फ पिछले 2 वर्षों में ही जिले के लगभग आधा दर्जन गांवों में धर्मांतरण हुआ है। ध्यान देने वाली बात ये भी है कि जिन लोगों पर धर्मांतरण कराने के आरोप लगे हैं, उनमें अधिकतर पहले हिन्दू हुआ करते थे। गया के नैली पंचायत के बेलवादीह गांव में 50 हिन्दू परिवारों द्वारा ईसाई मजहब अपनाए जाने की खबर आई थी।

इसी तरह 6 वर्ष पहले मानपुर प्रखंड के खंजाहापुर गांव में 500 लोग हिन्दू से बौद्ध बन गए थे। टेकारी के केवड़ा, मुफ्फसिल के दोहारी, अतरी के टेकरा, बोधगया के अतिया और गया सदर के रामसागर टैंक इलाके में धर्म-परिवर्तन की घटनाएँ सामने आई हैं। डोभी से लेकर बाराचट्‌टी तक, कई गांवों में धर्मांतरण की ख़बरें सामने आती रहती हैं। इसके पीछे अंधविश्वास को कारण बताया जा रहा है। सालों से इसके पीछे लगे गिरोह इसकी तैयारी करते हैं।

संदर्भ : OpIndia

Tuesday, 20 July 2021

हिंदू जागरण मंच के विरोध के बाद ईसाई धर्मांतरण करा रहे 5 लोगों को यूपी पुलिस ने किया ​गिरफ्तार

 

हिंदू जागरण मंच के विरोध के बाद ईसाई धर्मांतरण करा रहे 5 लोगों को यूपी पुलिस ने किया ​गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कासगंज जिले में धर्मांतरण का प्रयास कर रहे 5 लोगों को ​गिरफ्तार कर लिया है। वहीं, 6 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। पुलिस ने धर्म परिवर्तन करा रहे लोगों के पास से आपत्तिजनक साहित्य भी बरामद किया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सिकंदरपुर वैश्य थाना क्षेत्र गाँव गंगपुर में रविवार (18 जुलाई) को हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं को ईसाई धर्म का प्रचार करने वाले लोगों द्वारा धर्मांतरण कराने की सूचना मिली। इसके बाद दर्जनों कार्यकर्ता गाँव में पहुँचे और उन्होंने इसका विरोध किया।

हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं का आरोप है कि जब उन्होंने ईसाई धर्मांतरण का विरोध किया, तो उन लोगों ने उनके साथ मारपीट की। उन्होंने तत्काल इसकी सूचना पुलिस को दी। पुलिस ने मौके पर पहुँचकर आरोपितों की तलाशी ली। इस दौरान धर्मांतरण करा रहे लोगों के पास से पुलिस को एक कॉपी में हिंदू देवी-देवताओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणियाँ लिखी हुई मिली।

हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है और 5 लोगों को धर्मांतरण मामले में गिरफ्तार कर लिया है। हिंदू जागरण मंच के पदाधिकारी अरविंद गुप्ता ने इन लोगों के खिलाफ थाना सिकंदरपुर वैश्य में एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने श्रीनिवास, कुलदीप निवासी लधौली, राहुल कुमार निवासी कपिपुरा जैथरा, शिवकुमार निवासी गाँव नगला रामजीत, दुर्गेश निवासी हरौड़ा, रामपाल निवासी गंगपुर और किशन निवासी नगला बोडार पर धर्म ​परिवर्तन का आरोप लगाया है।

बता दें कि उत्तर प्रदेश से हर रोज धर्मांतरण के नए मामले सामने आ रहे हैं। सोमवार (19 जुलाई) को बागपत जिले में 15 साल की दलित किशोरी के साथ गैंगरेप, धर्मांतरण और गोमांस खिलाने का मामला सामने आया। पीड़िता के 7 महीने की गर्भवती होने के बाद मामले का खुलासा हुआ। पुलिस ने मुख्य आरोपित शहजाद और उसके अम्मी-अब्बू को गिरफ्तार कर लिया है।

संदर्भ : OpIndia

Wednesday, 19 May 2021

ଜଙ୍ଗଲ ଜମିରେ ଚର୍ଚ୍ଚ ନିର୍ମାଣକୁ ବିରୋଧ

 ଖ୍ରୀଷ୍ଟିଆନଙ୍କ ଆତଙ୍କରାଜ

ଜଙ୍ଗଲ ଜମିରେ ଚର୍ଚ୍ଚ ନିର୍ମାଣକୁ ବିରୋଧ

https://samajaepaper.in/imageview_60_195202111513890_4_75_19-05-2021_8_i_1_sf.html

Sunday, 9 May 2021

नेहरू के अखबार का वो पत्रकार, जिसने पोप को दी चुनौती… धर्म परिवर्तन के खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद की रखी नींव

 ଧର୍ମାନ୍ତରିକରଣ

नेहरू के अखबार का वो पत्रकार, जिसने पोप को दी चुनौती… धर्म परिवर्तन के
खिलाफ विश्व हिन्दू परिषद की रखी नींव
https://hindi.opindia.com/miscellaneous/indology/swami-chinmayananda-saraswati-founded-vhp-challenged-pope-and-christian-conversion/

Saturday, 8 May 2021

ଆରଜିଏଚରେ କରୋନା ଭଲ ହେବା କହି ଧର୍ମାନ୍ତିକରଣ ପ୍ରୟାସ

 ଧର୍ମାନ୍ତିକରଣ

ଆରଜିଏଚରେ କରୋନା ଭଲ ହେବା କହି ଧର୍ମାନ୍ତିକରଣ ପ୍ରୟାସ
https://vskodisha.com/odia-news-93/

Saturday, 1 May 2021

ईसाई बन जाओ’ – बीवी ही कर रही पति को प्रताड़ित, मना करने पर फाड दी हिंदू धर्म की पुस्तकें

 

ईसाई बन जाओ’ – बीवी ही कर रही पति को प्रताड़ित, मना करने पर फाड दी हिंदू धर्म की पुस्तकें

मध्य प्रदेश के इंदौर में बलपूर्वक धर्म परिवर्तन कराने का मामला सामने आया है। पुलिस ने शुक्रवार को पति को कथित रूप से पीटने और धर्म परिवर्तन का दबाव बनाने के आरोप में महिला और उसके परिवार के 9 लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया।

पुलिस ने बताया कि शिकायतकर्ता प्रकाश नागले (36 वर्षीय) ने आरोप लगाया है कि उसे ईसाई धर्म में परिवर्तन करने के लिए 50,000 रुपए का लालच दिया गया था। जब उसने धर्मांतरण करने से मना कर दिया तो उसकी पत्नी और ससुराल वालों ने उसके साथ मारपीट की। उन्होंने सभी धार्मिक पुस्तकों को भी फाड़ दिया। नागले ने बताया कि अनुपम ब्रदर नाम का एक शख्स 25 फरवरी 2021 से ही उस पर धर्म परिवर्तन करने का दबाव बना रहा है।

मामला प्रकाश में आने के बाद द्वारकापुरी थाना प्रभारी सतीश द्विवेदी ने कहा, “हमने धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020 की धारा 3 और 5 के तहत 10 लोगों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया है। उन सभी पर दंगा करने, बलपूर्वक धर्मांतरण कराने और धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाने का आरोप लगाया गया है।”

पति-पत्नी के बीच आए दिन होता था विवाद

थाने के एक अन्य अधिकारी ने बताया कि पति-पत्नी के बीच आए दिन विवाद होता रहता था। इससे पहले पत्नी दो से तीन बार पति के खिलाफ मारपीट की रिपोर्ट दर्ज करवा चुकी है। पत्नी का कहना है कि नागले उसे और उसके बच्चे के साथ मारपीट करता है। हालाँकि, हमने ताजा मामला प्रकाश में आने के बाद शुक्रवार को नागले की पत्नी, 4 साले, साली उसके बेटों और सास-सुसर के खिलाफ मामला दर्ज कर किया है। इसकी जाँच जारी है।

मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020

गौरतलब है कि मध्य प्रदेश धार्मिक स्वतंत्रता अधिनियम, 2020 की धारा 3 में यह प्रावधान है कि कोई भी व्यक्ति किसी भी दूसरे व्यक्ति को प्रलोभन, धमकी, विवाह या किसी अन्य जरिए से धर्म परिवर्तन नहीं करा सकता है। यह दंडनीय अपराध है।

इसके लिए कम से कम एक वर्ष और अधिकतम 5 वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। महिला, नाबालिग, अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति के धर्म परिवर्तन किए जाने पर कम से कम 2 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की सजा है। सामूहिक धर्म परिवर्तन करने पर कम से कम 5 वर्ष और अधिकतम 10 वर्ष की सजा। पैतृक धर्म में वापसी को इस अधिनियम में धर्म संपरिवर्तन नहीं माना गया है। पैतृक धर्म वह माना गया है, जो व्यक्ति के जन्म के समय उसके पिता का धर्म था।

इसके अलावा, अधिनियम की धारा 5 में कहा गया है कि यदि कोई भी व्यक्ति धारा 3 के तहत प्रावधानों का उल्लंघन करता है तो उस व्यक्ति को एक अवधि के लिए कारावास की सजा दी जाएगी, जो एक वर्ष से कम नहीं होगी लेकिन जो पांच साल तक बढ़ सकती है।

15 हिंदू परिवारों के 50 सदस्यों ने किया धर्म परिवर्तन

दरअसल, यह कोई पहला मामला नहीं है, इससे पहले भी धर्म परिवर्तन कराने की कोशिशों में जुटे कई ईसाई धर्म प्रचारकों को गिरफ्तार किया जा चुका है। धर्मांतरण के लिए विदेशी धन का इस्तेमाल देश की सुरक्षा और स्थिरता के लिए बड़ी चुनौतियों को जन्म दे रहा है।

इससे पहले उत्तर प्रदेश पुलिस ने अगस्त 23, 2020 को एक शख्स को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। द इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली का 30 वर्षीय मनदीप कुमार एटा में रहता था, जहाँ वह लोगों को ईसाई धर्म में परिवर्तित करने की कोशिश कर रहा था। रिपोर्ट में कहा गया था कि मनदीप कुमार ने अगस्त 22, 2020 को शिवसिंहपुर गाँव में हिंदू दंपती के घर पर उन्हें जबरन बाइबिल पढ़ाने की कोशिश की थी।

वहीं, बिहार के नवादा जिले में 8 फरवरी, 2020 को 15 हिंदू परिवारों के 50 सदस्यों ने धर्म परिवर्तन कर ईसाई धर्म अपना लिया था। ईसाई मिशनरी अब नेपाल के कई ठिकानों से भारतीय सीमा क्षेत्र के ग्रामीण इलाके में मजबूती से दस्तक दे रहे हैं। इनका एकमात्र मकसद यही है कि ज्यादा से ज्यादा ईसाई धर्म को मानने वाले लोग बनें।

इसके अलावा पिछले साल अक्टूबर में केरल सरकार ने ‘सेक्युलर’ फरमान जारी किया था, “हिन्दू छोड़ ईसाई बन जाओ, नौकरियों का विशेष स्कोप है यानी हिन्दू धर्म छोड़कर ईसाई बनने वालों के लिए विशेष तौर पर सुरक्षित किए गए इन पदों का वेतन ₹45,800 से ₹89000 रखा गया था।

संदर्भ : OpIndia